..जिंदगी के नशे में.……

जिंदगी के नशे में \ कुछ गाता हूँ \ गुनगुनाता हूँ \ कभी चीखता चिल्लाता हूँ \ रोता रुलाता हूँ \ तो कभी हँसता हंसाता हूँ \ या कभी चादर ओढ़ कर \ चुप-चाप सो जाता हूँ…

Thursday, 21 February 2013

मंच से तब लौट आना

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मैं चला अब बांध के सामान अपना ; आप आओ मंच पर मेले लगाओ । आप की महफ़िल बड़ी गुलज़ार होगी ; है दुआ कि आप जग में जगमगाओ । वक़्त आने प...
Sunday, 30 December 2012

मुझे ले चलो

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काफ़ी देर से वो दूर क्षितिज के उस छोड़ पर अपनी नजरें गराए खड़ी थी । मानो उस अँधेरी रात में वो आकाश के परदे के पीछे छिपे चाँद...
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Dayanand Arya
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