..जिंदगी के नशे में.……

जिंदगी के नशे में \ कुछ गाता हूँ \ गुनगुनाता हूँ \ कभी चीखता चिल्लाता हूँ \ रोता रुलाता हूँ \ तो कभी हँसता हंसाता हूँ \ या कभी चादर ओढ़ कर \ चुप-चाप सो जाता हूँ…

Wednesday, 18 September 2013

हिंसा का बुल्डोज़र

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बीच चौराहे पे पड़ी थी उसकी लाश जो चीख़ -चीख़  बताए जा रही थी  हत्यारों के नाम। लोगों में आक्रोश था; चारों ओर  भयानक शोर था; कोई नहीं सु...
Monday, 5 August 2013

- माँ! जगाओ राम को

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माँ! जगाओ राम को जग छा रही रजनी अँधेरी । अतल-तम संधान हेतु फूंक दे रण-बिगुल, भेरी॥ दीप नयनों में जला दे, चेतना में ओज भर दे। काट दे...
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Dayanand Arya
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