..जिंदगी के नशे में.……

जिंदगी के नशे में \ कुछ गाता हूँ \ गुनगुनाता हूँ \ कभी चीखता चिल्लाता हूँ \ रोता रुलाता हूँ \ तो कभी हँसता हंसाता हूँ \ या कभी चादर ओढ़ कर \ चुप-चाप सो जाता हूँ…

Friday, 18 October 2013

आनंद और दर्द

›
हाँ, आज तुम बाहें पसारे आनंद ले लो बारिश की बूंदों में भींगने का; कल जब तुम्हारे सर पे छत नहीं होगी, तो पूछूँगा - कि भीगते बिस्तर पे ...
6 comments:
Wednesday, 16 October 2013

आसन्न खतरा

›
अंधेरों की सनसनाहट संगीत नही, भयानक शोर जो फाड़ डाले कान के परदों को - अचानक थम जाती है ।  …शायद कोई आसन्न ख़तरा घुल ...
5 comments:
‹
›
Home
View web version

अपना क्य़ा है :-

Dayanand Arya
View my complete profile

Pages

▼
Powered by Blogger.