..जिंदगी के नशे में.……

जिंदगी के नशे में \ कुछ गाता हूँ \ गुनगुनाता हूँ \ कभी चीखता चिल्लाता हूँ \ रोता रुलाता हूँ \ तो कभी हँसता हंसाता हूँ \ या कभी चादर ओढ़ कर \ चुप-चाप सो जाता हूँ…

Saturday, 2 November 2013

व्यक्तिगत वसीयत

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ऐसे गुजरे वो दिन जिस दिन मुझे जाना हो - कि तेरी एक मुस्काती सी छवि सारे दिन फंसी रहे मन के किसी कोने में  । कुछ ब...
Friday, 18 October 2013

आनंद और दर्द

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हाँ, आज तुम बाहें पसारे आनंद ले लो बारिश की बूंदों में भींगने का; कल जब तुम्हारे सर पे छत नहीं होगी, तो पूछूँगा - कि भीगते बिस्तर पे ...
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Dayanand Arya
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