..जिंदगी के नशे में.……

जिंदगी के नशे में \ कुछ गाता हूँ \ गुनगुनाता हूँ \ कभी चीखता चिल्लाता हूँ \ रोता रुलाता हूँ \ तो कभी हँसता हंसाता हूँ \ या कभी चादर ओढ़ कर \ चुप-चाप सो जाता हूँ…

Sunday, 5 April 2015

प्रेम का अंकुर

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                        1.  अनसुनी यह कौन सी धुन छिड़ रही है  छेड़ता है कौन मन के तार को फिर  अंकुरण किस भाव का यह हो रहा है  जागत...
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Saturday, 21 March 2015

निंदिया

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निंदिया के घरौंदों में सपनों को बुला लेना पलकों के किवाड़ों को हौले से सटा लेना । टूटे न देखो ये निंदिया … मोती से नयनों की निंदिया … ...
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Dayanand Arya
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