..जिंदगी के नशे में.……

जिंदगी के नशे में \ कुछ गाता हूँ \ गुनगुनाता हूँ \ कभी चीखता चिल्लाता हूँ \ रोता रुलाता हूँ \ तो कभी हँसता हंसाता हूँ \ या कभी चादर ओढ़ कर \ चुप-चाप सो जाता हूँ…

Thursday, 9 April 2015

तुम नहीं हो !

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तुम नहीं हो ! गुलदान कोने में सहमा सा पड़ा है। मुझसे पूछना चाहता है - कब आओगे ? कब जाओगे ? पर पूछता नहीं। तरस गया है- जिन्दा फ...
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Sunday, 5 April 2015

प्रेम का अंकुर

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                        1.  अनसुनी यह कौन सी धुन छिड़ रही है  छेड़ता है कौन मन के तार को फिर  अंकुरण किस भाव का यह हो रहा है  जागत...
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Dayanand Arya
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