..जिंदगी के नशे में.……

जिंदगी के नशे में \ कुछ गाता हूँ \ गुनगुनाता हूँ \ कभी चीखता चिल्लाता हूँ \ रोता रुलाता हूँ \ तो कभी हँसता हंसाता हूँ \ या कभी चादर ओढ़ कर \ चुप-चाप सो जाता हूँ…

Saturday, 4 July 2015

नजरिया -: सिलसिला

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हर कलाकार अपनी कला के माध्यम से जिंदगी को समझने-समझाने की कोशिश करता है । कहीं एक पहलू तो कहीं दूसरे पहलू को विस्तार देता है ताकि उसकि कई ...
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Sunday, 3 May 2015

वक़्त की कूची- जिंदगी के कैनवस

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क्यूँ ठिठक सा गया वक़्त मेरी जिंदगी के कैनवस पे अपनी कूचियों से रंग भरते-भरते। .... दूर आकाश में चमकते सितारों के चकाचौंध सपने मैं ...
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Dayanand Arya
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