..जिंदगी के नशे में.……

जिंदगी के नशे में \ कुछ गाता हूँ \ गुनगुनाता हूँ \ कभी चीखता चिल्लाता हूँ \ रोता रुलाता हूँ \ तो कभी हँसता हंसाता हूँ \ या कभी चादर ओढ़ कर \ चुप-चाप सो जाता हूँ…

Wednesday, 2 September 2015

दिल्ली से बिछुड़ते समय

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मैं नहीं चाहूँगा  की दिल्ली मेरे रग रग में बहे  जरूरत बनकर। मैं चाहूँगा की जैसे  यादों की खुसबू बनकर  मौके बेमौके महकते हैं  देहरादून ...
4 comments:
Saturday, 22 August 2015

तूँ और मैं

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"क्या दादा आप इस 4G के टाइम में अभी भी 2G गड्डी हाँक रहे हो ।" "देखो दिल के मामले में सहूलियत से काम लेना चाहिए ।  प्यार क...
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Dayanand Arya
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