..जिंदगी के नशे में.……

जिंदगी के नशे में \ कुछ गाता हूँ \ गुनगुनाता हूँ \ कभी चीखता चिल्लाता हूँ \ रोता रुलाता हूँ \ तो कभी हँसता हंसाता हूँ \ या कभी चादर ओढ़ कर \ चुप-चाप सो जाता हूँ…

Saturday, 10 October 2015

कविता ऐसी भी क्या? किस काम की ?

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तुम्हारा कवित्व सोना है - उछालो उसे- खड़ा और चमकदार - ताकि दुनिया गुणे । उसे गुदरी में क्या छिपाना की कोई पहचान न सके कोई डिटेक्टर ...
Thursday, 1 October 2015

ये कैसी लपलपाती आग है

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ये कैसी लपलपाती आग है जो जल रही है। जिसके जद में खरगोश, चूहे, बिल्ली, आते हैं और आते है घास, पतवार, हिरन, बकरी, कुत्ते और सियार। सब ज...
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Dayanand Arya
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