..जिंदगी के नशे में.……

जिंदगी के नशे में \ कुछ गाता हूँ \ गुनगुनाता हूँ \ कभी चीखता चिल्लाता हूँ \ रोता रुलाता हूँ \ तो कभी हँसता हंसाता हूँ \ या कभी चादर ओढ़ कर \ चुप-चाप सो जाता हूँ…

Saturday, 30 March 2013

मैं एक माटी की मूरत

›
एक मूरत थी मैं माटी  की सुन्दर सी, सलोनी सी। मुझे हर पल बनाया गया था, सजाया गया था तेरे लिए। थी अमानत मैं कुम्हार की या...
2 comments:
Monday, 25 March 2013

द्वेष रहित सपनों का संसार (A conflict-less world of dreams )!

›
न बंधने दें  रंगों को  रूढ़ प्रतीकों में- गोरा - सांवला  उजला - काला  भगवा - हरा  लाल - नीला  या ...
2 comments:
‹
›
Home
View web version

अपना क्य़ा है :-

Dayanand Arya
View my complete profile

Pages

▼
Powered by Blogger.