..जिंदगी के नशे में.……

जिंदगी के नशे में \ कुछ गाता हूँ \ गुनगुनाता हूँ \ कभी चीखता चिल्लाता हूँ \ रोता रुलाता हूँ \ तो कभी हँसता हंसाता हूँ \ या कभी चादर ओढ़ कर \ चुप-चाप सो जाता हूँ…

Monday, 5 August 2013

- माँ! जगाओ राम को

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माँ! जगाओ राम को जग छा रही रजनी अँधेरी । अतल-तम संधान हेतु फूंक दे रण-बिगुल, भेरी॥ दीप नयनों में जला दे, चेतना में ओज भर दे। काट दे...
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Thursday, 18 July 2013

मुक्त-जीवन

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मेरे अंक मे तेरे प्यार की थाती नहीं मेरे कल का सहारा नहीं एक नया जीवन है जो मुक्त है भूत की परछाइयों से और भविष्य की अपेक्षाओं से। ...
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Dayanand Arya
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