..जिंदगी के नशे में.……

जिंदगी के नशे में \ कुछ गाता हूँ \ गुनगुनाता हूँ \ कभी चीखता चिल्लाता हूँ \ रोता रुलाता हूँ \ तो कभी हँसता हंसाता हूँ \ या कभी चादर ओढ़ कर \ चुप-चाप सो जाता हूँ…

Friday, 20 December 2013

दिल की भाषा

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तुम भोले हो दर्द से अनजान दिल की भाषा क्या जानो । दिल दर्द में पक कर समझने लगता है दिलों की भाषा- सुन पता है दिलों में स्प...
2 comments:
Saturday, 2 November 2013

व्यक्तिगत वसीयत

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ऐसे गुजरे वो दिन जिस दिन मुझे जाना हो - कि तेरी एक मुस्काती सी छवि सारे दिन फंसी रहे मन के किसी कोने में  । कुछ ब...
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Dayanand Arya
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