..जिंदगी के नशे में.……

जिंदगी के नशे में \ कुछ गाता हूँ \ गुनगुनाता हूँ \ कभी चीखता चिल्लाता हूँ \ रोता रुलाता हूँ \ तो कभी हँसता हंसाता हूँ \ या कभी चादर ओढ़ कर \ चुप-चाप सो जाता हूँ…

Saturday, 10 May 2014

उपासना

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तुझे मेरे लिये नदी बनाना होगा प्रिये  ! उनका बहाव भी और कल-कल स्वर भी ; फूल भी पत्ते भी डालियाँ भी और पूरा का पूरा पेड़ भी ; घाँस भी ...
Monday, 24 February 2014

बहता मन

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सोंचता हूँ बहने दूँ मन को इन मदमस्त हवाओं के साथ के शायद खुद ढूँढ़ सके कि यह क्या चाहता है। के शायद कहीं इसके सवालों का जवाब मिल जाये ...
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Dayanand Arya
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