Tuesday, 7 May 2013

। प्रहसन ।

 
 पर्दा अभी उठा नहीं था । पर्दे के पीछे से आवाजें आ रही थी -
     " भौं ... भौं ...       भौं ... भौं ...!!! "
           " भौं ... भौं ...       भौं ... भौं ...!!! "  .......

      आवाजें धीरे-धीरे नजदीक आती हैं और अंततः पर्दे  के पास तक पहुँच जाती हैं । पर्दा उठता है । मंच पे हल्की ग्रे लाईट है । वीरान और अस्त व्यस्त शहर के किसी कोने का दृश्य है । कुत्तों के दो झुण्ड आमने- सामने एक दूसरे पर भूंक रहे हैं-

     " भौं ... भौं ...       भौं ... भौं ...!!! "
     " भौं ... भौं ...     भौं ... भौं ...!!! "   -----1, 2, 3, 4,......

       
तभी ऊपर से मांस का एक लोथड़ा आ कर उनके बीच गिरता है । दोनों झुंडों का भूंकना बंद हो जाता है और वो एक साथ उस लोथड़े पर टूट पड़ते हैं । छीना-झपटी शुरू हो जाती है। जिसे जितना टुकड़ा मिला वही ले कर वो झुण्ड से थोड़ा अलग आ जाता है । शांति से अपने टुकड़े को हजम करने के बाद वह फिर से अपने झुण्ड में आ जाता है । थोड़ी देर बाद जब सभी अपने अपने हिस्से ख़त्म करके अपने-अपने झुण्ड में वापस आ चुके होते हैं , एक कुत्ता जिसके हिस्से में हड्डी आयी थी, अब भी उसे चबाने में मस्त था । दोनों झुंडों के सभी कुत्तों की आँखें उसी पर टिकी है । भूँकने की आवाज फिर से शुरू होती है। पहले एक दो शुरू करते हैं फिर धीरे -धीरे सभी मिलकर उस एक पे भूँकने  लगते हैं ।

         "भौं ... भौं !!.       भौं ... भौं ... भौं !!!      भौं ... भौं ...       भौं ... भौं ...!!!! "

         थोड़ी देर बाद वह कुत्ता हड्डी वहीँ छोड़ अपने झुण्ड में शामिल हो जाता है । कुत्तों के दोनों झुण्ड फिर से एक दूसरे पर भूँकने  लगते हैं ।


           " भौं ... भौं ...       भौं ... भौं ...!!! "
                 " भौं ... भौं ...       भौं ... भौं ...!!! "   -----1, 2, 3, 4,......

         पर्दा गिरता है । भूँकने आवाजें अब भी आ रही है । फिर ये आवाजेंधीरे-धीरे दूर जाती हुई नेपथ्य में विलीन हो जाती है। 

Saturday, 6 April 2013

तुम आते..


वह नॉर्मली पार्टियों में नहीं जाता, बड़ा अनकम्फर्टेबल फील करता है । आज ही पता नहीं कितने  दिनों बाद दोस्तों के साथ पार्टी में आया था । दोस्त क्या! colleague थे, अचानक ज़िद कर बैठे और वह मना नहीं कर पाया।  वह खुद भी आखिर इस trauma से तो निकलना ही चाहता था। आखिर कब तक यूँ दुनियां से भागता फिरता...    यह रोहित की बर्थडे पार्टी थी । यही एक है जिससे वह इधर कुछ बोल-चाल लेता है। बात है की रोहित अपने में मस्त रहता है, ज्यादा इधर-उधर से उसे कोई मतलब नहीं। किसी के लाइफ में में ज्यादा झांकने की कोशिश नहीं करता । इसी कारण से शायद उसके चारों तरफ जो एक दीवार बन गयी है, वो रोहित अपने लिए खतरा नहीं मानती।

खैर! सारे लोग पार्टी में व्यस्त थे। वह भी रेगुलर कर्ट्सी के साथ सबसे मिला, रोहित को wish किया और धीरे-धीरे टेरिस पे आ गया। वहां एक दो चेयर लगी थी पर था कोई नहीं। अन्दर से शोर गुल की आवाजें आ रही थी । साथ में डी जे की आवाज भी आ रही थी-

गल मेरी सुन ले सोहने
बस इतना कहना है 
दिल देना है ये तुझको 
लव तुझसे करना है......

आती क्या ?
बता !
चल अपने नाल...

पर वह ज्यादा देर तक ऐसी जगहों पर रुक कहाँ पता है ।


















अब तक तो वह कहीं और जा चुका था । जहाँ शायद वो ( कौन ये तो मुझे भी नहीं पता ) उसके साथ तो नहीं थी पर उसकी आवाज शायद उस तक पहुँच रही थी -  

तुम आते 
जीवन मुस्काता 
होतीं साथ बहारें,
अपना भी
जग रौशन होता 
छंट जाते अंधियारे...

तेरी राहें
तकती आँखें
कबसे आस लगाये,
आओ हम 
तुम मिलकर प्यारी
दुनियां एक बनायें

बिन तेरे
जीवन सूना ये
हर पल तुझको पुकारे 
तुम आते 
जीवन मुस्काता 
होतीं साथ बहारें...


अन्दर से अब भी आवाजें आ रहीं थी-


from- article.timesofindia.indiatimes.com














गल्ला ना कर तूं छोरे 
देखी है तेरी जात 
दिल देना-वेना क्या है
जानूं तेरी हर बात...

ये कुड़ियां
समझतीं हैं 
तेरी हर चाल..... 

और वो अब भी पता नहीं किससे बातें कर रहा था-

समझाते
हम खुल कर तुमको
अपने दिल की बातें,
इक मौका
जो हमको देते 
लौट के जो तुम आते ...

देखो यूँ 
कब तक रूठोगे 
अब तो मान भी जाओ,
मेरी हर
इक साँस पुकारे
तुम आओ - तुम आओ...

भूल गए
यूँ छोड़ के मुझको 
बोलो किसके सहारे,
तुम आते 
जीवन मुस्काता 
होतीं साथ बहारें...... 
Images : courtsy google
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