Thursday, 18 July 2013

मुक्त-जीवन

मेरे अंक मे
तेरे प्यार की थाती नहीं
मेरे कल का सहारा नहीं
एक नया जीवन है
जो मुक्त है
भूत की परछाइयों से
और भविष्य की अपेक्षाओं से।


13 comments:

  1. बहुत सुन्दर सुकोमल माँ सी मासूम प्यारी रचना

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  2. माँ के अहसास की कोमल अनुभूति
    बहुत सुंदर
    बधाई

    आग्रह है मेरे ब्लॉग में भी सम्मलित हों
    केक्ट्स में तभी तो खिलेंगे--------

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  3. बहुत सुंदर माँ की ममता का कोमल अहसास .....

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  4. एक नया जीवन है
    जो मुक्त है
    भूत की परछाइयों से
    और भविष्य की अपेक्षाओं से।


    बहुत सुंदर...!

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  5. आपकी इस उत्कृष्ट प्रस्तुति की चर्चा कल रविवार, दिनांक 21/07/13 को ब्लॉग प्रसारण पर भी http://blogprasaran.blogspot.in/ कृपया पधारें । औरों को भी पढ़ें

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  6. अति सुन्दर..

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  7. सुंदर माँ की ममता....प्यारी रचना

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  8. हाँ, ये ममता का असीम आकाश ही है जिसने आसानी से इस भाव को समाहित कर लिया, वरना मैं तो डर रहा था कि शायद इसे माँ के अधिकार में encroachment माना जाएगा ।

    आभार, कि आपने इसे सराहा ।

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  9. माँ की इस ममता को पकड़ के रखना, जकड के रखना .... भूत और भविष्य के पंजे दूर खींचने का प्रयत्न करते रहेंगे ...

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  10. प्रयत्न रहेगा ।
    आपके सत्-प्रेरणा से ।

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  11. माँ की ममता ही कुछ ऐसी होती है
    बहुत सुन्दर

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    Replies
    1. धन्यवाद भाई जी!

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  12. बहुत खूब , शब्दों की जीवंत भावनाएं... सुन्दर चित्रांकन
    कभी यहाँ भी पधारें और लेखन भाने पर अनुसरण अथवा टिपण्णी के रूप में स्नेह प्रकट करने की कृपा करें |
    http://madan-saxena.blogspot.in/
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Images : courtsy google
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