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Friday, 18 October 2013

आनंद और दर्द

हाँ, आज तुम बाहें पसारे
आनंद ले लो
बारिश की बूंदों में भींगने का;
कल जब तुम्हारे सर पे
छत नहीं होगी, तो पूछूँगा -
कि भीगते बिस्तर पे
कैसे मजे में गुजरी रात !

आज देख लो ये रंगीन नजारे
ये बागीचे, ये आलीशान शहर;
कल जब लौट के आने को
कोई ठिकाना नहीं होगा, तो पूछूँगा-
चलो कहाँ चलते हो घूमने !

आज तुम झंडा बुलंद कर लो
सम्पन्नता प्रचालित न्याय नीति का;
कल जब पेट में
नहीं होगा अन्न का दाना, तो पूछूँगा-
कहो कब तक उल्लुओं-कौवों को
उडाने दोगे अपना निवाला !


Tuesday, 7 May 2013

। प्रहसन ।

 
 पर्दा अभी उठा नहीं था । पर्दे के पीछे से आवाजें आ रही थी -
     " भौं ... भौं ...       भौं ... भौं ...!!! "
           " भौं ... भौं ...       भौं ... भौं ...!!! "  .......

      आवाजें धीरे-धीरे नजदीक आती हैं और अंततः पर्दे  के पास तक पहुँच जाती हैं । पर्दा उठता है । मंच पे हल्की ग्रे लाईट है । वीरान और अस्त व्यस्त शहर के किसी कोने का दृश्य है । कुत्तों के दो झुण्ड आमने- सामने एक दूसरे पर भूंक रहे हैं-

     " भौं ... भौं ...       भौं ... भौं ...!!! "
     " भौं ... भौं ...     भौं ... भौं ...!!! "   -----1, 2, 3, 4,......

       
तभी ऊपर से मांस का एक लोथड़ा आ कर उनके बीच गिरता है । दोनों झुंडों का भूंकना बंद हो जाता है और वो एक साथ उस लोथड़े पर टूट पड़ते हैं । छीना-झपटी शुरू हो जाती है। जिसे जितना टुकड़ा मिला वही ले कर वो झुण्ड से थोड़ा अलग आ जाता है । शांति से अपने टुकड़े को हजम करने के बाद वह फिर से अपने झुण्ड में आ जाता है । थोड़ी देर बाद जब सभी अपने अपने हिस्से ख़त्म करके अपने-अपने झुण्ड में वापस आ चुके होते हैं , एक कुत्ता जिसके हिस्से में हड्डी आयी थी, अब भी उसे चबाने में मस्त था । दोनों झुंडों के सभी कुत्तों की आँखें उसी पर टिकी है । भूँकने की आवाज फिर से शुरू होती है। पहले एक दो शुरू करते हैं फिर धीरे -धीरे सभी मिलकर उस एक पे भूँकने  लगते हैं ।

         "भौं ... भौं !!.       भौं ... भौं ... भौं !!!      भौं ... भौं ...       भौं ... भौं ...!!!! "

         थोड़ी देर बाद वह कुत्ता हड्डी वहीँ छोड़ अपने झुण्ड में शामिल हो जाता है । कुत्तों के दोनों झुण्ड फिर से एक दूसरे पर भूँकने  लगते हैं ।


           " भौं ... भौं ...       भौं ... भौं ...!!! "
                 " भौं ... भौं ...       भौं ... भौं ...!!! "   -----1, 2, 3, 4,......

         पर्दा गिरता है । भूँकने आवाजें अब भी आ रही है । फिर ये आवाजेंधीरे-धीरे दूर जाती हुई नेपथ्य में विलीन हो जाती है। 

Images : courtsy google
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