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Saturday, 24 January 2015

।। वासंती ।।

            टूटे तार
            खंड-खंड स्वर
            राग विखंडित
            क्षिप्त रागिनी
ऐ मृदुले! जीवन के सुर-
            संयोजित कर दे ।।

           टूटे-फूटे छंद
            भाव बिखरे-बिखरे से
            रस की सरिता सूखी सी
            सब शब्द अनमने
            भटका हुआ कहन
            कथन सब बासी-बासी
            काव्य प्रवाह शून्य
            जीवन पर्यन्त उदासी
सरस! सुकोमल शुद्ध भाव से
            हृदय ताल भर दे ।।

            लोक-जगत
            सब विद्रूप अंकित
            सब दिक् - मौसम
            धूसर रंजित
            दिवस-निशा
            सब अलसाये से
दे! अब कुछ
            जागृति  के क्षण दे


वासंती ! इन नयनों में
            सौंदर्य बोध भर दे ।।



Friday, 17 May 2013

यादों के भँवर- Whirling memories

आ !
आज  हम मिलकर रो लें, 
जो यादों के भँवर ने 
हमें एक दूसरे के इतना पास ला छोड़ा है । 

डूबते उतरते हुए, इस भँवर में,
कभी तो आ जाएगा हमें तैरना-
ताकि हम तय कर सकें सफ़र 
अपने वजूद से तेरे वजूद के बीच का ...

         *    *    *















याद है ?
जब एक पुल हुआ करता था 
हमारे वाजूदों को जोड़ता हुआ 
जिस पर बैठे रहते थे हम दोनों 
कभी जरा मेरी ओर 
तो कभी जरा तेरी ओर-
और उस पुल के नीचे से बह जाया करता था 
जाने कितना वक़्त 
शान्त निश्चल पानी की तरह ...

         *     *     *

फिर याद है ?
वक़्त की लहरों में एक बवंडर सा उठा था 
जिसने पुल के साथ -साथ 
ऊँचे आसमानों तक फैले 
हमारे इंद्रधनुषी ख्वाबों को भी 
चकनाचूर कर दिया  
और हम धम्म से आ गिरे थे 
यादों के भँवर में।

फिर घिरे हुए उस भँवर में 
जाने कब वक़्त ने 
हमें अपनी लहरों में बहाते हुए 
अपने-अपने वजूद पर लाकर छोड़ दिया ...

          *    *    *

वक़्त अब भी गुजरता था 
पर हम तट पे खड़े थे 
तटस्थ,
सिमटे हुए अपने वजूद में
और आँखे गड़ी थीं 
गुजरते हुए वक़्त के उस पार 
तेरे वजूद की ओर।

कई बार तैर कर पार करना चाहा  
वक़्त की इस दरिया को
पर यादों के वो भँवर-
साँसें उखड़ जाती थीं!
हम डूबने लगते थे! ...

और आज उसी भँवर ने जो ला छोड़ा है हमें 
एक दूसरे के कहीं आस- पास 
तो क्यों ना हम मिल कर रो लें 
की कभी तो आ जायेगा हमें तैरना
और तय कर सकेंगे सफ़र 
अपने वजूद से तेरे वजूद के बीच का  ... 
  




Let our self
Be drowned into tears
As whirls of memories
Brought us together…

Some day
We will learn to swim
Through these memories
To cross this river
Between our existence.

     *    *    *

Once
There was a bridge
Connecting our beings.
Sitting on which
Feeling like sometimes more me
And sometimes more you.
We used to fantasize
Life like a rainbow
While beneath that
A lot of time passed
Calmly like water…

   *    *     *

And then
A  storm of vicious misfortune
Broke that fascinating spell.
And we fall into
Vortex of memories
Which ferried us to
Banks of our own existence.

   *    *    *

Time was still passing
But we ware untouched by its flow..
Yearning  to mingle with your being
Across the vast river of time.

Many a times
I wanted to cross this river
But those vortex of memories
Swirling around our being
Started drowning me…

And now that
Whirling with memories
We came so close to each others being
Let our self
Be drowned into tears.

That same day
We will learn to swim
Through these memories
To cross this lapse
Between our existence...

Saturday, 6 April 2013

तुम आते..


वह नॉर्मली पार्टियों में नहीं जाता, बड़ा अनकम्फर्टेबल फील करता है । आज ही पता नहीं कितने  दिनों बाद दोस्तों के साथ पार्टी में आया था । दोस्त क्या! colleague थे, अचानक ज़िद कर बैठे और वह मना नहीं कर पाया।  वह खुद भी आखिर इस trauma से तो निकलना ही चाहता था। आखिर कब तक यूँ दुनियां से भागता फिरता...    यह रोहित की बर्थडे पार्टी थी । यही एक है जिससे वह इधर कुछ बोल-चाल लेता है। बात है की रोहित अपने में मस्त रहता है, ज्यादा इधर-उधर से उसे कोई मतलब नहीं। किसी के लाइफ में में ज्यादा झांकने की कोशिश नहीं करता । इसी कारण से शायद उसके चारों तरफ जो एक दीवार बन गयी है, वो रोहित अपने लिए खतरा नहीं मानती।

खैर! सारे लोग पार्टी में व्यस्त थे। वह भी रेगुलर कर्ट्सी के साथ सबसे मिला, रोहित को wish किया और धीरे-धीरे टेरिस पे आ गया। वहां एक दो चेयर लगी थी पर था कोई नहीं। अन्दर से शोर गुल की आवाजें आ रही थी । साथ में डी जे की आवाज भी आ रही थी-

गल मेरी सुन ले सोहने
बस इतना कहना है 
दिल देना है ये तुझको 
लव तुझसे करना है......

आती क्या ?
बता !
चल अपने नाल...

पर वह ज्यादा देर तक ऐसी जगहों पर रुक कहाँ पता है ।


















अब तक तो वह कहीं और जा चुका था । जहाँ शायद वो ( कौन ये तो मुझे भी नहीं पता ) उसके साथ तो नहीं थी पर उसकी आवाज शायद उस तक पहुँच रही थी -  

तुम आते 
जीवन मुस्काता 
होतीं साथ बहारें,
अपना भी
जग रौशन होता 
छंट जाते अंधियारे...

तेरी राहें
तकती आँखें
कबसे आस लगाये,
आओ हम 
तुम मिलकर प्यारी
दुनियां एक बनायें

बिन तेरे
जीवन सूना ये
हर पल तुझको पुकारे 
तुम आते 
जीवन मुस्काता 
होतीं साथ बहारें...


अन्दर से अब भी आवाजें आ रहीं थी-


from- article.timesofindia.indiatimes.com














गल्ला ना कर तूं छोरे 
देखी है तेरी जात 
दिल देना-वेना क्या है
जानूं तेरी हर बात...

ये कुड़ियां
समझतीं हैं 
तेरी हर चाल..... 

और वो अब भी पता नहीं किससे बातें कर रहा था-

समझाते
हम खुल कर तुमको
अपने दिल की बातें,
इक मौका
जो हमको देते 
लौट के जो तुम आते ...

देखो यूँ 
कब तक रूठोगे 
अब तो मान भी जाओ,
मेरी हर
इक साँस पुकारे
तुम आओ - तुम आओ...

भूल गए
यूँ छोड़ के मुझको 
बोलो किसके सहारे,
तुम आते 
जीवन मुस्काता 
होतीं साथ बहारें...... 

Monday, 25 March 2013

द्वेष रहित सपनों का संसार (A conflict-less world of dreams )!




























न बंधने दें 
रंगों को 
रूढ़ प्रतीकों में-
गोरा - सांवला 
उजला - काला 
भगवा - हरा 
लाल - नीला 
या और भी कई ।
सबको मिलने दें आपस में 
मुक्त होकर 
उनके प्रतीकों के द्वन्द से ।

जरूरी नहीं है 
कि वो मिलें इस तरह 
कि हो जाएँ एकरूप,
क्योंकि इस तरह जन्म लेगा
फिर कोई नया रंग
अपने नए प्रतीकों- 
सिद्धांतों में रूढ़ होकर 
अपने खुद के 
पूर्वाग्रहों के संग ।


उन्हें मिलनें दें आपस में 
अक्षुणण रखते हुए अपनी विशेषताएं 
ताकि वो मिलकर 
एक खूबसूरत संसार बनाएं-
तितली के परों जैसा 
मोर के पंख जैसा 
या बारिश के बाद के 
इन्द्रधनुष जैसा 
   - द्वेष रहित सपनों का संसार !




These colours -
'Black-White & Gray
Saffron & Green
Red & Blue
Pink & Violet
And many others'
- Don't keep them
In separate boxes
Symbolizing
Different conflicting perspective.
- Don't confine them
To limited boundary (of any bloc)


Let them flow freely
To mingle within themselves.
But be cautious-
Don't pour them all
In a new container
As again they will be stiffed
As a new symbol
With its own hue and saturation.

Let Them combine together
With all There essence unaltered
To form a Picturesque world
Consisting of vibrant colours
Like - wings of butterfly
Like - feather of peacock
Like - a rainbow
In rain-washed sky
- A conflict-less world of dreams !




Saturday, 23 February 2013

झील और पत्थर


अभी-अभी सुनीता रूम से बाहर गई थी की मैं रूम में आया, देखा टेबल पर एक दो पुरानी  कॉपियाँ पड़ी थी।  एक कॉपी से एक फ़ोटो बाहर झाँक रहा  था।  मैंने फ़ोटो  निकालने के लिए कॉपी खोला तो पहचाने से अक्षरों में कुछ लिखा था .....


दो पल की मुलाकात,
और
वो मुझमे उतर गया
झील में गिरे
किसी पत्थर की तरह ;

फैलते रहे मेरे वजूद पर
उसकी यादों के घेरे
जैसे उस झील में तरंग;

और उस पेज के साथ रखी थी मेरी वही फ़ोटो जो मैंने सगाई से पहले उसके छोटे भाई के हाँथों उसे भिजवाई थी।  मैं उन पुरानी यादों में खोने ही वाला था की तभी सुनीता कुछ बड़बड़ाती हुई अन्दर आयी-
 "जहाँ देखो मुझे ही सारी तैयारी करनी पड़ती है, ये भी नहीं की आज ही ऑफिस से थोड़ा जल्दी आ जाते ।पता  नहीं उन्हें आज का दिन याद भी है या नहीं "

अचानक मुझे देख कर वो चौंक गयी। फिर मुझे लगा वो कुछ सिमटती सी जा रही है।  मैं गेस नहीं कर पा रहा था की वो नाराज है या शरमा रही है....         




This poem may be considered as my hindi rendering of a post by @iBeingMe
circles
Images : courtsy google
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