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Saturday, 21 March 2015

निंदिया


निंदिया के घरौंदों में सपनों को बुला लेना
पलकों के किवाड़ों को हौले से सटा लेना ।
टूटे न देखो ये निंदिया …
मोती से नयनों की निंदिया …
सपनों-सपनों मचलती ये निंदिया … ।।

हिडोले पे मद्धम सुरों के - ख्वाबों की अनगिन कहानी
सांसों की तुतली जुबानी - मन ही मन में सुना देना
पलकों के किवाड़ों को  हौले से सटा लेना ।
टूटे न देखो ये निंदिया …
नाजुक सी ज्यूँ बंद कलियाँ …
चाँद - तारों गुजरती ये निंदिया … ।।


उजला सवेरा उगेगा - रात के पार वाली जमीं पर
रात काली अँधेरी है तो क्या - ख़्वाब में है चमकता हुआ कल
यूँ अंधेरों से जब सामना हो - दीप दिल में जला लेना
पलकों के किवाड़ों को - हौले  से सटा लेना ।
टूटे न देखो ये निंदिया …
थक के सोती सुरीली सी निंदिया …
ख्वाब कल की संजोती ये निंदिया.... ।



Saturday, 13 December 2014

वो खाली समय


मुझे समय मत दो...

वो खाली समय
जब मेरे पास करने को कुछ न हो,
सोंचने को कुछ न हो। 
जब मेरे इस ऊपरी
बाहर से ओढ़े हुए सतह में
कोई हलचल न हो। 
जब वर्तमान परिस्थितियों,
आवश्यकताओं
और कर्तव्यों का नशा,
उसका खुमार
टूटने लगे .…

मैं आप ही अपने अंदर उतरने लगता हूँ;
वहाँ मुझे मिलता है -
एक धुंधला कब्रिस्तान
जहाँ ताबूतों में दफ़्न हैं
मेरे ख्वाबों के मृत शरीर
जहाँ पंख कटे फड़फड़ा रहे हैं
मेरी उम्मीदें, मेरी हशरतें।
वहाँ मुझसे मिल जाते हैं
फर्श पर यूँ ही चकनाचूर हो बिखरे पड़े कई रिश्ते
जो कभी शीशे के फ्रेम में मढ़ कर
मैंने दिल के दीवारों  पे सजा रखे थे।
वहीं  से निकलती हैं
और भी कई अँधेरी सुनसान गलियां
जो पता नहीं कहाँ तक ले कर जाती हैं।
थोड़े ही और अंदर
कुछ ही दूरी पर
बह रही होती है एक नदी
प्रतिबिंबित करती हुई
आकाश का धुंधलका ....



















… बस मुझे बाहर खींच लो
अब मुझे एक पल भी यहाँ न रुकने दो
कहीं धुंधलके को चीड़ कर
सवेरा फिर से नदी में न चमकने लगे।
कहीं सूरज की कोई किरण
उस कब्रिस्तान को रौशन करने न निकल पड़े
मुझे डर लगता है
कि  रौशनी के किसी किरण के छूते ही
मेरे अंदर जो एक निर्वात है,
खालीपन है
मुझे महसूस होने लगेगा …


कई ख्वाब करवटें लेने लगेंगी
कई हसरतें जागने  लगेंगी
कुछ रिश्ते दिल के दरवाजे पर दस्तक देने लगेंगे

… मैं अपने अंदर फिर से जन्म लेने लगूँगा ।

मैं नहीं चाहता की की मेरी निगाहे
फिर से कोई ख्वाब देखे … फिर से उन्हें दफनाने के लिए;
मेरी हसरतों , उम्मीदों के नए पंख उग आए …
फिर से कट जाने के लिए;
मैं नहीं चाहता कि कोई रिश्ता मेरे दिल तक पहुँचे
फिर से टूट कर बिखर जाने के लिए।

… मैं अपने अंदर
जो मर हुआ सा कोई जिन्दा है
उसे फिर से जिन्दा करने से डरता हूँ ।
 

Monday, 5 August 2013

- माँ! जगाओ राम को

माँ! जगाओ राम को
जग छा रही रजनी अँधेरी ।
अतल-तम संधान हेतु
फूंक दे रण-बिगुल, भेरी॥
दीप नयनों में जला दे,
चेतना में ओज भर दे।
काट दे तम-पाश को,
फिर भोर-नव को एक स्वर दे ॥
सड़ित-लोकाचार, जड़ता
व्यूह घिर निश्चल पड़ा जग।
प्रात-नव में नव-धरा पर
नव किरण संचार कर दे॥  …

व्यक्ति-व्यक्ति की महत्ता
धूमिल है, निश्तेज श्रम है।
ज्ञान है पूंजी की दासी ,
अर्थ सत्, सब अन्य भ्रम है ॥
स्वार्थ की सत्ता चतुर्दिक,
हिंस्र है सामर्थ्यशाली ।
निर्धन, भुभुक्षु समाज
 सबके हाँथ खाली, पेट खाली ॥
स्वार्थ के हाँथों हृदय,
मष्तिष्क और विवेक अपहृत ।
मूल्य सब मृत-प्राय हैं,
है बंधुता-सद्भावना मृत ॥.… 

सौर-शौर्य जगा, हृदय में
लक्ष्य स्थापना कर दे ।
बाहु में बल, चित्त में
उत्कर्ष का संकल्प भर दे॥
प्राणी-मात्र सामान हो,
सबका सकल उत्थान हो,
सर्वजन हित, सर्वजन सुख,
सर्वजन हेतु सम स्थान हो ॥
ज्ञान, शक्ति, अर्थ सब पर
सबका सम अधिकार हो।
स्नेह से सद्भावना से
पूर्ण  हर व्यवहार हो ॥.…

ताप हरने  इस धरा के
नीर-निज करुना बहा दे।
शुष्क प्राण विराट जग में
हरित अभिलाषा जगा दे ॥

चेतना में ओज भर दे। 
दीप नयनों में जला दे॥

 - माँ! जगाओ राम को ।
हर नयन में है सो रहा जो
नींद बन कर ।।




  

Monday, 9 July 2012

Journey With Rays

किरणों का जादू 


कभी बंद आँखों से  महसूस करो 
ये हवाए
तुम्हारे रोम -रोम में समा जाना चाहती हैं; 
ये किरणें 
तुम्हारे भीतर उतर कर 
तुम्हारे अंतस को प्रकाशित करना चाहती हैं।
इन्हें अपना दो पल दो-
ये तुमपे कोई जादू करेंगी
बस इन्हें सहजता से देखना, 
रोकना मत ;

तुम एक नयी दुनिया में जागोगे 
जहाँ तुम्हारे साथ होंगी 
पूरी धरती को एक सूत्र में बांधती ये हवा 
असीम ब्रह्मांड के उस पार से आती प्रकाश की किरणें;
तुम्हारा हृदय स्पंदित हो उठेगा 
अनंत समुद्र की लहरों के लय  में  
तुम  हलके  हो जाओगे 
शून्य के सामान ;


तब तुम क्षितिज पर छा  जाना
बादल बन कर 
और बारिश बन कर भिंगोना 
धरती के कण-कण को ...
भींग जाने दें खुद को भी 
इस अनोखी बारिश में 
धुल जाने देना इसमें अपना अतीत,
घुल जाने देना 
भविष्य के धुएं को भी इसमें...

फिर तुम वर्तमान में तैर सकोगे 
एक चैतन्य प्रकाश की किरण बनकर ।






Feel
With your eyes closed;
A gust of wind
Wishes to breath into you,
A ray of light
Wishes to enlighten your innermost. 
For a few moments
Watch them with quietude,
With them, they will take you
Where you can feel
The air,
Unifying the atmosphere of whole earth
The light,
Traversing across the infinite.
Where your heart will beat
 On the lyrics of eternal wave.
It will feel weightless like naught,
Then winging like clouds
You spread over horizon
And rain to wet every single particle of earth
With drops of  ecstatic joy.

In this supernal rain,
Let yourself be wet,
Past be washed away
And fumes of future be dissolved.

And then you would be
Rapturously winging into present
on ray of consciousness.



Thursday, 22 March 2012

Floting Wishes!


हे  प्रभु !
एक  प्रार्थना  है  तुझसे 
कि  ये  मासूम  मुस्कान 
जिनका  अक्स  पड़ते  ही  खिल  उठता  है
हर  उदास  दिल ,
हमेशा  यूँ  ही  महकते  रहें ;
कि  सूरज  चाँद  और  सितारों  से  सजे  ऊँचे  आसमान 
इनका  आंगन  हो 
जिनमे  खेला  करें  ये  उम्र  भर 
बेख़ौफ़ , बिना  किसी  बंदिश  के 
अपनी  ख्वाबों  के  डैने  फैलाये  ;
सलामत  रहें  इनके  सपने , इनकी  नींदें ,
(स्नेह  के )  पानी  के  बिना , इनकी  प्यास  न  सुखने  पाए ;
रस्ते  इनके  लिए 
हर  ओर  खुली  रखना 
पर  न  देना  इन्हें  अंधी  भूख  मंजिल  की ;
चलना  या  रुकना  राहों  पे 
इनके  इख़्तियार  में  देना
क्यों  इन्हें  तेरे  अलावे  और  कोई  चलाये ;
हाँ ,
माँ  सा  साया  सर पे  इनके
हमेशा  बने  रहना ,
सम्हालना  इन्हें  हर  ठोकर  के  बाद ;
देना  इनको  वो  जिगर , वो  दिल
कि  हर  दुःख  से  लड़  सकें 
कि  अपना  सकें  हर  दुखी  को.......


एक  खुदगर्ज़  सी  ख्वाहिश  और  भी  है
कि  हो  सके  तो  कर  लेना 
मुझे भी  इन्ही  में  शामिल 
कि  मैं  भी  खिलूँ  फूलों  कि  तरह 
कि  महकूँ  बागों  कि  तरह
कि  चहकुं  पक्षी  कि  तरह
कि इस  सवेरे  के  स्वागत  को 
एक  स्वर  मेरा  भी  हो
जो  समवेत हो
सूरज  कि  अरुण  किरणों  से ...

सवेरा  होने  दो  प्रभु !
सवेरा  होने  दो !




O! Lord
Bless these innocent flowers
With ever lasting pretty smile,
To soothe every sullen heart
With warmth of their mirthfulness.
Bless them with boundless sky
With ever shining sun and moon.
In which untrammeled they can fly
On the wings of dreams.

Secure all their dreams
Whether awake or in sleep.
Never ever let their needs die
Without realization.
Their own path, let them follow
Without falling for pseudo-
Objectives set by ego.
Let nothing other then yours mighty wish
Dictate them.
Be their patron-
To guide them through all the way,-
To hold them in every disturbance.
Give them courage
To confront every hardship.
Fill their heart with solace
For every disconsolate.

May be it is selfish
But one more wish I do have.
Let me be one among them-
To bloom like flower
Filling the garden with fragrance
-To tweet like those birds
Proclaiming the breaking of dawn
In a note
In unison with the crimson ray of sun.


Images : courtsy google
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