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Thursday, 16 October 2014
Saturday, 2 November 2013
व्यक्तिगत वसीयत
ऐसे गुजरे वो दिन
जिस दिन मुझे जाना हो -
कि तेरी एक मुस्काती सी छवि
सारे दिन फंसी रहे
मन के किसी कोने में ।
कुछ बातें कर लूँ अपनों से;
दुआ कर सकूँ उनके खैरियत की।
न कोई जल्दी हो
यहाँ से जाने की ,
और न कोई टीस
यहाँ कुछ छूट जाने की ।
हाँ, उस रोज जरूर देख सकूँ
सूरज को उगते हुए ;
जरूर सुने हो मैंने
पंछियों के किसी झुंड की चहचहाहट ;
जरूर बतियाया होऊं मैं
किसी भोले नटखट बचपन से;
और पानी दे सकूँ मैं आखिरी बार
गमले में खुद से लगाये किसी पौधे में ;
और फिर सो जाऊं
एक हल्की सी मुस्कान के साथ।
क्या हर दिन ऐसे ही नहीं गुजर सकता ?
क्योंकि कौन जाने कब चलना पड़ जाये ।
Saturday, 25 May 2013
बावरा-मन
(आज सुबह से ही वह कुछ अजीब सा महसूस कर रहा था- कुछ बँटा-बँटा सा। पहले से चली आ रही उदासी भी, और उसको झुठलाती हुई, उसको चीड़ती हुई एक ताजगी भी। आइने में भी उसने ख़ुद को कुछ बदला हुआ सा पाया। अचानक आइने में उसके दो-दो अक्श उभर आये- वह मू्क दर्शक बना खड़ा रहा । दोनो अक्श, एक हारा हुआ और दूसरा जीतने को उत्साहित, बारी-बारी से अपना पक्ष रख रहे थे- )
1.
अधूरी राहों पे
अधूरे मन से
यूँ ही मैं........ चलता रहा ।
कहीं चल..... रे मन बावरे
सपनों..... का वो गाँव रे
जहां हो..... घनी छाँव रे
न जले..... जहाँ पाँव रे ।
वहीं चल..... रे मन बावरे .............
वहीं चल..... रे मन बावरे .............
2.
अधूरी ठोकरें
अधूरे सहारे
मैं गिरता रहा........ सम्हलता रहा ।
मंजिलें..... आज ओझल तो क्या
रास्ते..... आज बोझिल तो क्या
रुकना.......... ना तूँ राह में
आगे तूँ ........ बढ़ा पाँव रे ।
चला - चल..... रे मन बावरे .............
चला - चल..... रे मन बावरे .............
3.
अधूरा सा ख्वाब
अधूरी नींदों
मेंजाने क्यूँ........ पलता रहा ।
बस था........ वो इक ख्वाब रे
हो गया.......... जो बर्बाद रे
रह गया........ जो पीछे कहीं
क्यों करे........ उसे याद रे ।
चल ना ..... रे मन बावरे .............
4.
अधूरा ये सावन
किस अधूरी आग में
धुँआ-धुँआ........ जलता रहा ।
तेरे मन........ की वो बात रे
कोई हो........ तेरे साथ रे
तुझपे........ हो जिनको यकीं
तेरे हों........ जो दिन रात रे ।
वहीं चल..... रे मन बावरे .............
वहीं चल..... रे मन बावरे .............
5.
अधूरा ये जीवन
अधूरी ख्वाहिशें लिये
बस यूँ ही........ ढ़लता रहा ।
पाएगा ........ तुँ मंजिल कभी
हसरतें........ होंगी पूरी सभी
जिन्दगी........है ये सौगात रे
खुद खुदा........ है तेरे साथ रे ।
चल दे ..... तूँ मन बावरे .............
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चल दे ..... तूँ मन बावरे .............
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( और उसे लगा कि सच में उसका खुदा उसे नयी स्फूर्ती के साथ आगे बढ़ने के लिये प्रेरित कर रहा है | )
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