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Saturday, 21 March 2015

निंदिया


निंदिया के घरौंदों में सपनों को बुला लेना
पलकों के किवाड़ों को हौले से सटा लेना ।
टूटे न देखो ये निंदिया …
मोती से नयनों की निंदिया …
सपनों-सपनों मचलती ये निंदिया … ।।

हिडोले पे मद्धम सुरों के - ख्वाबों की अनगिन कहानी
सांसों की तुतली जुबानी - मन ही मन में सुना देना
पलकों के किवाड़ों को  हौले से सटा लेना ।
टूटे न देखो ये निंदिया …
नाजुक सी ज्यूँ बंद कलियाँ …
चाँद - तारों गुजरती ये निंदिया … ।।


उजला सवेरा उगेगा - रात के पार वाली जमीं पर
रात काली अँधेरी है तो क्या - ख़्वाब में है चमकता हुआ कल
यूँ अंधेरों से जब सामना हो - दीप दिल में जला लेना
पलकों के किवाड़ों को - हौले  से सटा लेना ।
टूटे न देखो ये निंदिया …
थक के सोती सुरीली सी निंदिया …
ख्वाब कल की संजोती ये निंदिया.... ।



Friday, 26 December 2014

आने वाले तेरा स्वागत !

आने वाले तेरा स्वागत !

नवल सूर्य की बंकिम किरणे 
करती  तेरा फिर-फिर अभिनन्दन। 
आने वाले तेरा स्वागत !

                       नई कोंपलें, नाजुक डंठल 
                      नई उमंगें, नव जीवन रस
                       पात-पात तेरा अभिरंजित 
                      अभिसिंचित हो ओस कणों से 
                      कली- कुमुद बन तूँ खिल जा रे !
                      खुशबू से इस धरा गगन को 
                      जीवन भर- दम भर महका रे!

चन्द्र- चाँदनी इठलाती सी 
जोहे तेरी राह ठिठककर। 
आने वाले तेरा स्वागत। 

                      तूँ  आना बन बरखा पावन 
                      बूँद बूँद हो तेरा शीतल 
                       सूखी धरती के अंतर को 
                      प्यासे जन के पीड़ित मन को 
                      नेह नीर सिंचित कर जा रे ! 
                      निज समर्थ्य भर जन-मन के तूँ 
                      ताप  मिटा -संताप मिटा रे !

मन मयूर सा पंख पसारे 
तुझे पुकारे आकुल हो कर। 
आने वाले तेरा स्वागत !

                      साहस लेकर जग में आना 
                      दुःख में सुन तूँ मत घबराना 
                      संघर्षों के समर भूमि में 
                      जीवन तुझे पुकारे प्रतिपल -
                      आता हूँ आवाज लगा रे !
                      सहज भाव से हर सुख दुःख को 
                      आगे बढ़ कर गले लगा रे !

हार जीत से परे जगत में 
जीवन लौ हो तेरा जगमग
आने वाले तेरा स्वागत !

Sunday, 12 October 2014

अहसास


एक अहसास
तेरे पास होने का
सिहरन
तेरी सांसों से छूने सा
खुशबू सी
हवा में यूँ फैल  गयी
चटक सा गया हो
कोई फूल अधखिला

जाने क्या था
वो झुकी पलकों सा
चाँद के पार चला
कोई पंछी मनचला
जैसे कुछ कहने सा 
वो पलक उठने सा

सूरज से, किरणों से
रौशन था  सवेरा
इधर से उधर -
यहाँ से वहां
तूँ जैसे फैल रही
मैं  तुम्हारा हूँ
जैसे तुम हूँ
तुम्ही हूँ।

Saturday, 25 May 2013

बावरा-मन


(आज सुबह से ही वह कुछ अजीब सा महसूस कर रहा था- कुछ बँटा-बँटा सा। पहले से चली आ रही उदासी भी, और उसको झुठलाती हुई, उसको चीड़ती हुई एक ताजगी भी। आइने में भी उसने ख़ुद को कुछ बदला हुआ सा पाया। अचानक आइने में उसके दो-दो अक्श उभर आये- वह मू्क दर्शक बना खड़ा रहा । दोनो अक्श, एक हारा हुआ और दूसरा जीतने को उत्साहित, बारी-बारी से अपना पक्ष रख रहे थे- )


1.

अधूरी राहों पे

अधूरे मन से

यूँ ही मैं........ चलता रहा ।


कहीं चल..... रे मन बावरे
सपनों..... का वो गाँव रे
जहां हो..... घनी छाँव रे
न जले..... जहाँ पाँव रे ।

वहीं चल..... रे मन बावरे .............

2.

अधूरी ठोकरें

अधूरे सहारे

मैं गिरता रहा........ सम्हलता रहा ।


मंजिलें..... आज ओझल तो क्या
रास्ते..... आज बोझिल तो क्या
रुकना.......... ना तूँ राह में
आगे तूँ ........ बढ़ा पाँव रे ।

चला - चल..... रे मन बावरे .............
3.

अधूरा सा ख्वाब

अधूरी नींदों 

मेंजाने क्यूँ........ पलता रहा ।


बस था........ वो इक ख्वाब रे
हो गया.......... जो बर्बाद रे
रह गया........ जो पीछे कहीं
क्यों करे........ उसे याद रे ।

चल ना ..... रे मन बावरे .............


4.

अधूरा ये सावन

किस अधूरी आग में

धुँआ-धुँआ........ जलता रहा ।


तेरे मन........ की वो बात रे
कोई हो........ तेरे साथ रे
तुझपे........ हो जिनको यकीं
तेरे हों........ जो दिन रात रे ।

वहीं चल..... रे मन बावरे .............

5.

अधूरा ये जीवन

अधूरी ख्वाहिशें लिये

बस यूँ ही........ ढ़लता रहा ।


पाएगा ........ तुँ मंजिल कभी
हसरतें........ होंगी पूरी सभी
जिन्दगी........है ये सौगात रे
खुद खुदा........ है तेरे साथ रे ।

चल दे ..... तूँ मन बावरे .............

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( और उसे लगा कि सच ‌में उसका खुदा उसे नयी स्फूर्ती के साथ आगे बढ़ने के लिये प्रेरित कर रहा है | )
Images : courtsy google
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