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Thursday, 1 October 2015

राक्षस



आँख खोलोगे तो देखोगे की मैं नहीं हूँ
मैं बन गया हूँ एक राक्षस
क्योंकि मुझे सपना आया था
की मुझपे कोई अत्याचार हुआ है।

Tuesday, 13 January 2015

जीवन साथी के लिए -

 मैं सुन नहीं पाया 
तुम्हारे क़दमों के लय को 
पहचान नहीं पाया 
तुम्हारे दिल के तरंग
को 
तुम्हारे कंठ के उमंग को 
बस इन्तजार करता रहा 
कि तुम मेरे लिए 
कोई प्रेम गीत गाओगी 
और तुम्हारा जीवन संगीत 
मेरे लिये अनसुना रह गया।

Wednesday, 15 October 2014

अतीत













काश कि जिन पन्नों में
तुम मेरा अतीत ढूंढते हो
उनमें तुमने कभी मुझे ढूंढा होता ....

मेरा वर्तमान तो तुम्हारा है  ही
फिर मेरे अतीत का भी तुम्ही लक्ष्य बन जाते। 



Sunday, 17 March 2013

वो लम्हा














उस लम्हे पे
वक़्त तो ठहरा था 
कुछ पल के लिए ; 
पर हम ही आशंकित हो-
उसके भीतर छुपी संभावनाओं से,
उसे अपना न सके ।
  

Time waits for a while
but we diffidently
run away
instead of
kissing ahead our way.



Saturday, 23 February 2013

झील और पत्थर


अभी-अभी सुनीता रूम से बाहर गई थी की मैं रूम में आया, देखा टेबल पर एक दो पुरानी  कॉपियाँ पड़ी थी।  एक कॉपी से एक फ़ोटो बाहर झाँक रहा  था।  मैंने फ़ोटो  निकालने के लिए कॉपी खोला तो पहचाने से अक्षरों में कुछ लिखा था .....


दो पल की मुलाकात,
और
वो मुझमे उतर गया
झील में गिरे
किसी पत्थर की तरह ;

फैलते रहे मेरे वजूद पर
उसकी यादों के घेरे
जैसे उस झील में तरंग;

और उस पेज के साथ रखी थी मेरी वही फ़ोटो जो मैंने सगाई से पहले उसके छोटे भाई के हाँथों उसे भिजवाई थी।  मैं उन पुरानी यादों में खोने ही वाला था की तभी सुनीता कुछ बड़बड़ाती हुई अन्दर आयी-
 "जहाँ देखो मुझे ही सारी तैयारी करनी पड़ती है, ये भी नहीं की आज ही ऑफिस से थोड़ा जल्दी आ जाते ।पता  नहीं उन्हें आज का दिन याद भी है या नहीं "

अचानक मुझे देख कर वो चौंक गयी। फिर मुझे लगा वो कुछ सिमटती सी जा रही है।  मैं गेस नहीं कर पा रहा था की वो नाराज है या शरमा रही है....         




This poem may be considered as my hindi rendering of a post by @iBeingMe
circles
Images : courtsy google
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