Showing posts with label pang. Show all posts
Showing posts with label pang. Show all posts
Thursday, 16 October 2014
Friday, 18 October 2013
आनंद और दर्द
हाँ, आज तुम बाहें पसारे
आनंद ले लो
बारिश की बूंदों में भींगने का;
कल जब तुम्हारे सर पे
छत नहीं होगी, तो पूछूँगा -
कि भीगते बिस्तर पे
कैसे मजे में गुजरी रात !
आज देख लो ये रंगीन नजारे
ये बागीचे, ये आलीशान शहर;
कल जब लौट के आने को
कोई ठिकाना नहीं होगा, तो पूछूँगा-
चलो कहाँ चलते हो घूमने !
आज तुम झंडा बुलंद कर लो
सम्पन्नता प्रचालित न्याय नीति का;
कल जब पेट में
नहीं होगा अन्न का दाना, तो पूछूँगा-
कहो कब तक उल्लुओं-कौवों को
उडाने दोगे अपना निवाला !
आनंद ले लो
बारिश की बूंदों में भींगने का;
कल जब तुम्हारे सर पे
छत नहीं होगी, तो पूछूँगा -
कि भीगते बिस्तर पे
कैसे मजे में गुजरी रात !
आज देख लो ये रंगीन नजारे
ये बागीचे, ये आलीशान शहर;
कल जब लौट के आने को
कोई ठिकाना नहीं होगा, तो पूछूँगा-
चलो कहाँ चलते हो घूमने !
आज तुम झंडा बुलंद कर लो
सम्पन्नता प्रचालित न्याय नीति का;
कल जब पेट में
नहीं होगा अन्न का दाना, तो पूछूँगा-
कहो कब तक उल्लुओं-कौवों को
उडाने दोगे अपना निवाला !
Wednesday, 16 October 2013
Subscribe to:
Posts (Atom)
Images : courtsy google


