Saturday, 21 March 2015

निंदिया


निंदिया के घरौंदों में सपनों को बुला लेना
पलकों के किवाड़ों को हौले से सटा लेना ।
टूटे न देखो ये निंदिया …
मोती से नयनों की निंदिया …
सपनों-सपनों मचलती ये निंदिया … ।।

हिडोले पे मद्धम सुरों के - ख्वाबों की अनगिन कहानी
सांसों की तुतली जुबानी - मन ही मन में सुना देना
पलकों के किवाड़ों को  हौले से सटा लेना ।
टूटे न देखो ये निंदिया …
नाजुक सी ज्यूँ बंद कलियाँ …
चाँद - तारों गुजरती ये निंदिया … ।।


उजला सवेरा उगेगा - रात के पार वाली जमीं पर
रात काली अँधेरी है तो क्या - ख़्वाब में है चमकता हुआ कल
यूँ अंधेरों से जब सामना हो - दीप दिल में जला लेना
पलकों के किवाड़ों को - हौले  से सटा लेना ।
टूटे न देखो ये निंदिया …
थक के सोती सुरीली सी निंदिया …
ख्वाब कल की संजोती ये निंदिया.... ।



Saturday, 24 January 2015

।। वासंती ।।

            टूटे तार
            खंड-खंड स्वर
            राग विखंडित
            क्षिप्त रागिनी
ऐ मृदुले! जीवन के सुर-
            संयोजित कर दे ।।

           टूटे-फूटे छंद
            भाव बिखरे-बिखरे से
            रस की सरिता सूखी सी
            सब शब्द अनमने
            भटका हुआ कहन
            कथन सब बासी-बासी
            काव्य प्रवाह शून्य
            जीवन पर्यन्त उदासी
सरस! सुकोमल शुद्ध भाव से
            हृदय ताल भर दे ।।

            लोक-जगत
            सब विद्रूप अंकित
            सब दिक् - मौसम
            धूसर रंजित
            दिवस-निशा
            सब अलसाये से
दे! अब कुछ
            जागृति  के क्षण दे


वासंती ! इन नयनों में
            सौंदर्य बोध भर दे ।।



Images : courtsy google
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